सेना का अनुशासन
कक्षा में: छात्रों के चरित्र निर्माण के प्रभावी तरीके
प्रस्तावना : आज की शिक्षा केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं
रहनी चाहिए। छात्रों के चरित्र, अनुशासन और जीवन
मूल्यों का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। भारतीय सेना में 17 वर्षों की सेवा और फिर
शिक्षा क्षेत्र में कार्य करते हुए मैंने यह अनुभव किया है कि सेना का अनुशासन यदि
कक्षा में सही ढंग से लागू किया जाए, तो छात्रों का सर्वांगीण
विकास संभव है।
यह अनुशासन डर पर नहीं, बल्कि कर्तव्य, आत्मनियंत्रण और
जिम्मेदारी पर आधारित हो। सेना का अनुशासन केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने
की एक सशक्त पद्धति है। यदि कक्षा में सैन्य अनुशासन के मूल तत्वों को अपनाया जाए,
तो छात्रों के व्यक्तित्व और चरित्र का सर्वांगीण विकास संभव है।
नीचे मैं अपने अनुभव के आधार पर ऐसे पाँच प्रभावी तरीकों को बतलाने का प्रयास किया
है जिनसे कक्षा में सेना-जैसा अनुशासन अपनाकर छात्रों का चरित्र निर्माण किया जा
सकता है—
1. समयपालन और नियमितता : सेना में समय का अत्यधिक महत्व होता है। कक्षा में समय पर आना, कार्य समय पर पूरा करना और दिनचर्या का पालन करना छात्रों
में जिम्मेदारी, आत्मनियंत्रण और कार्य के प्रति गंभीरता
विकसित करता है।
2. कर्तव्यबोध और उत्तरदायित्व : सेना में अधिकार से
पहले कर्तव्य सिखाया जाता है। छात्रों में भी यह भावना विकसित की जानी चाहिए कि- ‘पढ़ना
उनका कर्तव्य और नियमों का पालन उनका दायित्व है।’ सैनिक अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हैं। कक्षा में छात्रों को
छोटे-छोटे दायित्व (जैसे मॉनिटरशिप, समूह
कार्य) सौंपने से उनमें कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व और जवाबदेही
का भाव उत्पन्न होता है।
3. अनुशासन और आत्मनियंत्रण : सेना का अनुशासन आत्मनियंत्रण सिखाता है। कक्षा में नियमों का पालन, शालीन व्यवहार और मर्यादा बनाए रखने से छात्रों में संयम,
धैर्य और नैतिकता का विकास होता है।
4. टीमवर्क और सहयोग : सेना में सफलता टीमवर्क पर निर्भर करती है। समूह गतिविधियाँ, परियोजनाएँ और खेल छात्रों को सहयोग, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक लक्ष्य के लिए काम करना सिखाते हैं।
5. देशभक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास : सेना देशसेवा का प्रतीक है। कक्षा में देशभक्ति, ईमानदारी, साहस और त्याग जैसे
मूल्यों पर चर्चा और गतिविधियाँ छात्रों में सकारात्मक सोच और उच्च नैतिक चरित्र
का निर्माण करती हैं।
निष्कर्ष
: कक्षा में सेना के अनुशासन के तत्वों को अपनाकर
छात्रों को न केवल अनुशासित बनाया जा सकता है, बल्कि
उन्हें जिम्मेदार, नैतिक और आत्मनिर्भर नागरिक भी बनाया जा
सकता है। ऐसा चरित्र निर्माण ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।
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